आदेश -आदेश:- नाथ संप्रदाय के अनुयायी जब अन्य जाति या स्व जाति के लोगों से मिलते हैं तब “नमस्कार” “राम राम” या उनके स्थान पर “आदेश-आदेश” का उच्चारण करते हैं । इसी से वह आपस में एक दूसरे का अभिवादन करते हैं।
नाथों के पावन ग्रंथ “सिद्ध सिद्धांत पद्धती” में आदेश का स्वरुप स्पष्ट दर्शाया गया है।
उसके अनुसार जिसके प्रति “आदेश” के उचारण द्वारा ब्रह्म रूप का प्रतिपादन होता है ।
आदेश शब्द का वास्तविक अर्थ इस तरह होता है।
अ-आत्मा
दे-देवता(परमात्मा)
श-शरीरात्मा(जीवात्मा)
इन तीनों को एकता ही सत्य है और सत्य के अनुभव या दर्शन ही आदेश कहलाता है ।
आदेश आदेश के अभिवादन से नाथ योगी निरंतर एवं दूसरे को आत्मा परमात्मा व जीवात्मा परमात्मा का स्मरण करते हैं यही आदेश का स्वरुप है ।
जो प्राचीन काल से नाथ परंपरा में चला आ रहा है।
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