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Tuesday, 14 November 2017

दस महाविद्याओं में माँ धूमावती कास्थानसातवां है और माँके इस स्वरुप को बहुतही उग्र मानाजाता है ! माँ का यहस्वरुप अलक्ष्मीस्वरूपा कहलाता है किन्तुमाँअलक्ष्मी होते हुए भी लक्ष्मी है ! एकमान्यता के अनुसार जब दक्षप्रजापतिने यज्ञ किया तो उस यज्ञ मेंशिव जी कोआमंत्रित नहीं किया ! माँसती ने इसे शिवजी का अपमानसमझा और अपने शरीरको अग्नि मेंजला कर स्वाहा कर लियाऔर उसअग्नि से जो धुआं उठा उसनेमाँधूमावती का रूप ले लिया ! इसीप्रकारमाँ धूमावती की उत्पत्ति कीअनेकों कथाएँप्रचलित है जिनमे सेकुछ पौराणिक है औरकुछ लोकमान्यताओं पर आधारित है ! नाथसम्प्रदाय के प्रसिद्ध योगीसिद्धचर्पटनाथ जी माँ धूमावती केउपासकथे ! उन्होंने माँ धूमावती परअनेकोंग्रन्थ रचे और अनेकों शाबरमन्त्रोंकी रचना भी की ! यहाँ मैं माँधूमावतीका एक प्रचलित शाबर मंत्रदे रहा हूँ जोबहुत ही शीघ्र प्रभाव देताहै  ! कोर्ट कचहरीआदि के पचड़े मेंफस जाने पर अथवाशत्रुओं सेपरेशान होने पर इस मंत्र काप्रयोगकरे ! माँ धूमावती की उपासनासेव्यक्ति अजय हो जाता है और उसकेशत्रुउसे मूक होकर देखते रह जाते है !


||   मंत्र  ||

ॐ पाताल निरंजन निराकार

आकाश मंडल धुन्धुकार

आकाश दिशा से कौन आई

कौन रथ कौन असवार

थरै धरत्री थरै आकाश

विधवा रूप लम्बे हाथ

लम्बी नाक कुटिल नेत्र दुष्टा स्वभाव

डमरू बाजे भद्रकाली

क्लेश कलह कालरात्रि

डंका डंकिनी काल किट किटा हास्य करी

जीव रक्षन्ते जीव भक्षन्ते

जाया जीया आकाश तेरा होये

धुमावंतीपुरी में वास

ना होती देवी ना देव

तहाँ ना होती पूजा ना पाती

तहाँ ना होती जात न जाती

तब आये श्री शम्भु यती गुरु गोरक्षनाथ

आप भई अतीत

ॐ धूं: धूं: धूमावती फट स्वाहा !


||  विधि  ||

41 दिन तक इस मंत्र की रोज रात को एक माला जाप करे ! तेल का दीपक जलाये और माँ को हलवा अर्पित करे ! इस मंत्र को भूल कर भी घर में ना जपे, जप केवल घर से बाहर करे ! मंत्र सिद्ध हो जायेगा !


||  प्रयोग विधि १ ||

जब कोई शत्रु परेशान करे तो इस मंत्र का उजाड़ स्थान में 11 दिन इसी विधि से जप करे और प्रतिदिन जप के अंत में माता से प्रार्थना करे – “ हे माँ ! मेरे अमुक शत्रु के घर में निवास करो ! “


ऐसा करने से शत्रु के घर में बात बात पर कलह होना शुरू हो जाएगी और वह शत्रु उस कलह से परेशान होकर घर छोड़कर बहुत दुर चला जायेगा !


||  प्रयोग विधि २ ||

शमशान में उगे हुए किसी आक के पेड़ के साबुत हरे पत्ते पर उसी आक के दूध से शत्रु का नाम लिखे और किसी दुसरे शमशान में बबूल का पेड़ ढूंढे और उसका एक कांटा तोड़ लायें ! फिर इस मंत्र को 108 बार बोल कर शत्रु के नाम पर चुभो दे ! ऐसा 5 दिन तक करे , आपका शत्रु तेज ज्वर से पीड़ित हो जायेगा और दो महीने तक इसी प्रकार दुखी रहेगा !


नोट - इस मंत्र के और भी घातक प्रयोग है  जिनसे शत्रु के परिवार का नाश तक हो जाये ! किसी भी प्रकार के दुरूपयोग के डर से मैं यहाँ नहीं लिखना चाहता ! इस मंत्र का दुरूपयोग करने वाला स्वयं ही पाप का भागी होगा !

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